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Bashir Badr

Ankhon Mein Raha Dil Mein Utar Kar Nahi Dekha – Bashir Badr

आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा

बेवक़्त अगर जाऊँगा, सब चौंक पड़ेंगे
इक उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुमने मेरा काँटों-भरा बिस्तर नहीं देखा

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा

Updated: December 4, 2014 — 9:30 am

Agar Gale Nahi Milta To Hath Bhi Na Mila – Bashir Badr’s Ghazal

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता, तो हाथ भी न मिला
घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया, कोई आदमी न मिला
तमाम रिश्तों को मैं, घर में छोड़ आया था
फिर इसके बाद मुझे, कोई अजनबी न मिला
ख़ुदा की इतनी बड़ी कायनात में मैंने
बस एक शख़्स को मांगा, मुझे वही न मिला
बहुत अजीब है ये कुरबतों की दूरी भी
वो मेरे साथ रहा, और मुझे कभी न मिला

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Updated: December 4, 2014 — 9:16 am

Sar Jhukaoge To Patthar Devta Ho Jayega – Ghazal By Bashir Badr

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा
इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा
हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा
कितनी सच्चाई से मुझसे, ज़िन्दगी ने कह दिया
तू नहीं मेरा तो कोई दूसरा हो जाएगा
मैं खुदा का नाम लेकर, पी रहा हूं दोस्तों
ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा
सब उसी के हैं, हवा, ख़ुशबू, ज़मीन-ओ-आसमां
मैं जहां भी जाऊंगा, उसको पता हो जाएगा
Updated: December 4, 2014 — 9:13 am

Agar talaash karun koi mil hi jayega – Bashir Badr

Agar talaash karun koi mil hi jayega
Magar tumhaari tarah kaun mujh ko chahega
Tumhen zaroor koi chaahaton se dekhega
Magar wo aankhen hamari kahaan se layega
Na jane kab tere dil par nayi si dastak ho
Makaan khaali hua hai to koi aayega
Main apni raah mein deewar ban ke batha hun
Agar wo aaya to kis raaste se aayega
Tumhare saath ye mausam farishton jaisa hai
Tumhare baad ye mausam bahut sataayega

Updated: November 30, 2014 — 3:18 am

Bashir Badr Shayari – Parakhna mat parakhne mein koi apna nahi rehta

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Parakhna mat parakhne mein koi apna nahi rehta,
Kisi bhi Aaina me dair tak chehra nahi rehta…

Baray logon se milne me hamesha fasla rakha,
Jahan darya samandar se mila, darya nahi rehta…

Updated: November 28, 2014 — 9:29 am
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