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Category: Ghazals

इन रिन्दों की खुशफहमी को हवा दे दे

इन रिन्दों की खुशफहमी को हवा दे दे,
इन्हें चाहे शराब न दे मगर शीशा दे दे।

हमे आदत हैं तेरी निग़ाहों से पीने की,
सब शराबियो को उठाके मैख़ाना दे दे!

गर तुझसे मुहब्बत करके गुनाह किया,
दूर ना जा मुझसे, मुझे कोई सजा दे दे!

कल आये थे दयारे- इश्क़ के सिपाही,
मज़ा आ जाए कोई नाम तुम्हारा दे दे!

अब तो इक आदत हैं अलम सहने की,
कहीं से आ ऐ! बेदर्द मुझे दर्द नया दे दे!

तेरी बाद जिंदगी मेरी ‘तनहा’ हो गयी,
लाकर महब्बत के वो पल दुबारा दे दे!

अमन के लिए तो हम हकदार है यहाँ,
वतन-ए-अमन को नाम हमारा दे दे!

-Azeem Tanha

Updated: December 14, 2017 — 2:53 pm

Yeh Kis Mod Pe Aa Gai Hai Zindagi Meri

Yeh Kis Mod Pe Aa Gai Hai Zindagi Meri
Na Paa Sakte Hai Use Na Bhula Sakte Hai Use

Ab Kaise Katega Safar E Zindagi Uske Bina Yaroon
Dastaan E Gham Na Jata Sakte Hai Use Na Suna Sakte Hai Use

Tha Koi Shikwa Koi Shikayat Toh Bata Dete Hume ARIF
Dil Cheez Kya Hai Hum Jaan Bhi Luta Sakte Hai Use…

MUHAMMAD ARIF CHEETAL
Muzaffarnagar

Updated: December 14, 2017 — 2:49 pm

Ye zara zara se bat pe rooth jana chodh de

Ye zara zara se bat pe rooth jana chodh de
Rula k mujhe ji bhar k tu fir se manana chodh de,
Manta hu khilona mitti ka hu par Rooh-e-Mohabbat he mujhe tujhse,
Tu yun dilwale diwane se dil behlana chodh de,
Mukaddar ko bhi hua naaz mere haath ki lakeer dekh keke,
Main nhi tere Mukaddar me ye bahana chodh de…

-Ram

Updated: December 14, 2017 — 2:47 pm

कंकरीली राहों की कसक, आज भी ताज़ा है

कंकरीली राहों की कसक, आज भी ताज़ा है
गरम रेत की वो तपिश, आज भी ताज़ा है
फटी बिबाइयों का वो कशकता खामोश दर्द,
और कांटों की वो चुभन, आज भी ताज़ा है
रातों में जग कर अपनी फसलों का पहरा,
और माघ की वो ठिठुरन, आज भी ताज़ा है
जेठ में लू की लपकती भयानक वो लपटें,
और पशीने की वो लथपथ, आज भी ताज़ा है
बौराये आमों का तालाब के किनारे बगीचा,
कोकिल का वो मधु कलरव, आज भी ताज़ा है
मुद्दत गुज़र गयी कमल दल देखे बिना हमें,
मगर दिल में उनकी महक, आज भी ताज़ा है
वर्षों गुज़र गए घर से बेघर हुए हमको यारो,
मगर दिल में गांव की हवा, आज भी ताज़ा है

शांती स्वरूप मिश्र

Updated: December 14, 2017 — 2:37 pm

फरेबियों को तो हम, अपना समझ बैठे !

फरेबियों को तो हम, अपना समझ बैठे !
हक़ीक़त को तो हम, सपना समझ बैठे !
मुकद्दर कहें कि वक़्त की शरारत कहें,
कि पत्थर को हम, ज़िन्दगी समझ बैठे !
दुनिया की चालों से न हुए बावस्ता हम,
और उनको हम, अपना खुदा समझ बैठे !
दाद देते हैं हम खुद की अक्ल को “मिश्र”,
कि क़ातिलों को हम, फरिश्ता समझ बैठे !

शांती स्वरूप मिश्र

Updated: December 14, 2017 — 2:34 pm

क्या क्या खोया क्या पाया, हमको कुछ भी याद नहीं !

क्या क्या खोया क्या पाया, हमको कुछ भी याद नहीं !
किसने अरमानों को कुचला, हमको कुछ भी याद नहीं !

उतर गए थे हम तो यूं ही इस दुनिया के सागर में,
किसने बीच भंवर में छोड़ा, ये हमको कुछ भी याद नहीं !

इस कदर हुए कुछ ग़ाफ़िल हम इस परदेस में आकर,
कब कैसे अपना घर हम भूले, हमको कुछ भी याद नहीं !

किसे बताएं किस किस ने लूटा चैन हमारे जीवन का,
इस दिल को किसने कैसे नोंचा, हमको कुछ भी याद नहीं !

जो उलझ गए थे ताने बाने कभी न सुलझा पाये हम,
कहाँ कहाँ पर गांठ पड़ गयीं, ये हमको कुछ भी याद नहीं !

शांती स्वरूप मिश्र

Updated: December 14, 2017 — 2:21 pm

तमन्नाओं को लोग, पूरा होने नहीं देते !

तमन्नाओं को लोग, पूरा होने नहीं देते !
खुशियों के बीज वो, कभी बोने नहीं देते !

क्यों कर रुलाता है सब से ज्यादा वही,
जिसको कभी भी हम, यूं रोने नहीं देते !

हमतो टूटने के लिए बेक़रार हैं लेकिन,
दुनिया वाले फिर से, एक होने नहीं देते !

ज़फ़ाओं का तूफ़ान मचलता है जब कभी,
तो बर्बादियों के निशाँ, हमें सोने नहीं देते !

बुरा बनता है वही जो लुटाता है सब कुछ,
खुश हैं वो जो, अठन्नी भी खोने नहीं देते !

शांती स्वरूप मिश्र

Updated: December 14, 2017 — 2:19 pm

कुछ कहने की कुछ सुनने की, हिम्मत न रही अब !

कुछ कहने की कुछ सुनने की, हिम्मत न रही अब !
यूं हर किसी से सर खपाने की, हिम्मत न रही अब !

हम भी बदल गए हैं तो वो भी न रहे बिल्कुल वैसे,
सच तो ये है कि उनको भी, मेरी ज़रुरत न रही अब !

अब फ़ुरसत ही नहीं कि कभी उनको याद कर लें,
ख़ैर उनको भी हमारे जैसों से, मोहब्बत न रही अब !

देखना था जो तमाशा सो देख लिया इस जमाने ने,
मैं तो भूल गया सब कुछ, कोई नफ़रत न रही अब !

सोचता हूँ कि जी लूँ कुछ पल और ज़िंदगी के “मिश्र”,
यूं भी वक़्त का मुंह चिढ़ाने की, फ़ितरत न रही अब !

शांती स्वरूप मिश्र

Updated: December 14, 2017 — 2:18 pm

Romantic Ghazal In Hindi – मुझे अब भी याद आता है.

वो आँखों का मेरी आँखों से मिलना फिर धीरे से मुस्कुरा देना.

•मुझे अब भी याद आता है.

°किसी बात पर जोर से हसना फिर अगले ही पल पलकों को भिगो देना.

•मुझे अब भी याद आता है.

°वो चुपके से मेरे पास आना फिर किसी की आवाज़ से भाग जाना.

•मुझे अब भी याद आता है.

°किसी भी चीज़ का मुझे अपने हाथ से खिलाना फिर खुद खाना.

•मुझे अब भी याद आता है.

°मेरे हाथ पर अपना नाम लिखना और उस मेहँदी का रंग जाना.

•मुझे अब भी याद आता है.

°पहले मेरे जिस्म से लिपट जाना फिर जाने की जिद करना.

•मुझे अब भी याद आता है.

°दिन भर बाते करना और रात को मेरे पास आकर खामोश हो जाना.

•मुझे अब भी याद आता है

°मेरा नाम अपनी ज़िन्दगी और अपना नाम”तरन्नुम” बताना.

•मुझे अब भी याद आता है.

 

Submitted By : °शाहरुख़ उस्मान देहलवी

Updated: September 14, 2017 — 12:38 pm

Shayar Par Shayari – Sabhi Ko Daad Deta hai

Sabhi ko daad deta hai bada chalaak shayar hai,
phir uske baad dheere se aji kya khaak shayar hai

ghazal kehna na kehna uski marzi tumse kya matlab,
bhari mehfil mai to woh sahib-e-idraak shayar hai

yeh baat apni jagah duniya pasandi mai hai lasani,
bazahir to namazi sahibe miswak shayar hai

sukhan fehmo ki majlis mai hai wo john eliya jesa,
bohot kamzor insaa’n hai bada bebaak shayar hai

zaruri hai dhuke dil ko satakar or gham dena,
na itna zulm kar aey gardishe aflaak shayar hai

jo tehzibe mohabbat thhi wo tehzibe mohabbat hai,
garibaa’n chaak shayar thha garibaa’n chaak shayar hai

 

Submitted By: Tahir Faraz

Updated: March 3, 2017 — 2:59 pm
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