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Category: Manzil Shayari

Manzil Hindi Shayari – मंज़िल का पता है न



मंज़िल का पता है न किसी राहगुज़र का
बस एक थकन है कि जो हासिल है सफ़र का

Updated: May 25, 2017 — 8:56 pm

Manzil Hindi Shayari – मैं अकेला ही चला था

मैं अकेला ही चला था “जानिब-ए-मंज़िल”
” मगर”
लोग साथ आते गये और “कारवाँ” बनता गया.


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Updated: May 4, 2017 — 11:02 am

Manzil Hindi Shayari – किसी को घर से निकलते



किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल;
कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा।

Updated: April 10, 2017 — 10:54 am

Manzil Hindi Shayari – ये भी क्या मंज़र है



ये भी क्या मंज़र है बढ़ते हैं न रुकते हैं क़दम
तक रहा हूँ दूर से मंज़िल को मैं मंज़िल मुझे

Updated: March 21, 2017 — 4:49 pm
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