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Manzil Shayari

Two Lines Shayari – नहीं निगाह मे मंज़िल तो जुस्तजू ही सही 

नहीं निगाह मे मंज़िल तो जुस्तजू ही सही 
नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सही |


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Updated: January 10, 2015 — 2:55 pm

Two Lines Shayari – हम खुद तराशते हैं मंजिल के संग ए मील 

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हम खुद तराशते हैं मंजिल के संग ए मील 
हम वो नहीं हैं जिन को ज़माना बना गया

Updated: January 10, 2015 — 2:55 pm

2 Line Shayari – मंजिलें सब का मुकद्दर हों, यह ज़रूरी

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मंजिलें सब का मुकद्दर हों, यह ज़रूरी तो नहीं 
खो भी जाते हैं, नयी राहों पर चलने वाले

Updated: January 10, 2015 — 2:55 pm
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