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Category: Sad Shayari

Best Hindi Sad Shayari – हैरान हूँ मैं ख़ुद

हैरान हूँ मैं ख़ुद, अपने सब्र का पैमाना देखकर…*💕💕

*उसने याद नहीं किया, और मैंने इंतज़ार नहीं छोड़ा….!!!!* 💕💕

Updated: June 24, 2019 — 4:41 pm

Best Hindi Sad Shayari – मुझसे नहीं कटती अब

मुझसे नहीं कटती अब
ये उदास रातें.,
कल सूरज से कहूँगी …
.
.
मुझे साथ लेकर डूबे.!!

Updated: June 24, 2019 — 4:34 pm

Best Hindi Sad Shayari – काँपते हाथों से

काँपते हाथों से बंद किये थे कभी किवाड़ जिसके,
देख तेरा वही टूटता मकान हूँ मैं..!!

Updated: June 24, 2019 — 4:23 pm

Best Hindi Sad Shayari – मै घर मे बैठकर पढता

मै घर मे बैठकर पढता रहा सफर की दुआ

उसके वास्ते … जो मुझसे दूर जा रही थी

Updated: June 24, 2019 — 4:19 pm

Best Hindi Sad Shayari – सिर्फ़ धो​खा ही शुद्ध मिलता है

सिर्फ़ धो​खा ही #शुद्ध मिलता है

इस ज़माने में , साहिब बाक़ी तो सब में #मिलावट है ..

Updated: June 24, 2019 — 4:14 pm

Best Hindi Sad Shayari – आज इक और बरस बीत गया

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर

जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे ।

Updated: June 24, 2019 — 4:10 pm

Hindi Shayari – Koi shikwa bhi nahin

Koi shikwa bhi nahin koi shikayat bhi nahin…!!
Ab hamain tum say wo pehli si mohaBbat bhi nahin…❣️

Updated: June 14, 2019 — 12:38 pm

Shayari Two Line Only – मुझे क़बूल है

मुझे क़बूल है.. हर दर्द.. हर तकलीफ़ तेरी चाहत में..
सिर्फ़ इतना बता दो.. क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत क़बूल है..?

Updated: June 8, 2018 — 3:23 pm

Hindi Ghazal Shayari – Dil Ko Patthar Bana Liya

उनके सारे ग़मों को, दिल में सजा लिया हमने !
अपने मोम से दिल को, पत्थर बना लिया हमने !

खुशियों की आहट को जब जब भी सुना दूर से,
दिल पर उदासिओं का, पहरा लगा दिया हमने !

रौशनी की कमीं न हो महसूस उनको कभी भी,
ज़रुरत पड़ी तो अपना ही, दिल जल दिया हमने !

अफ़सोस कि हमें तज़ुर्बा न था ज़िन्दगी जीने का,
बस औरों की आग मे, खुद को जला दिया हमने !

ये कैसा अजीब सा नसीब पाया है हमने भी यारो,
जो खंज़र लिए बैठे हैं, उन्हीं को दिल दे दिया हमने !

Submitted By : शांती स्वरूप मिश्र

Updated: March 3, 2017 — 1:55 pm

Heart Touching Ghazal Shayari – Maut Ka Samaan Dhoondhta Hai

न बची जीने की चाहत, तो मौत का सामान ढूंढता है !
क्या हुआ है दिल को, कि कफ़न की दुकान ढूंढता है !

समझाता हूँ बहुत कि जी ले आज के युग में भी थोड़ा,
मगर वो है कि बस, अपने अतीत के निशान ढूंढता है !

मैं अब कहाँ से लाऊं वो निश्छल प्यार वो अटूट रिश्ते ,
बस वो है कि हर सख़्श में, सत्य और ईमान ढूंढता है !

दिखाई पड़ते हैं उसे दुनिया में न जाने कितने हीअपने,
मगर वो तो हर किसी में, अपने लिए सम्मान ढूंढता है !

मूर्ख है “मिश्र” न समझा आज के रिश्तों की हक़ीक़त,
अब रिश्तों से मुक्ति पाने को, आदमी इल्ज़ाम ढूंढता है !

Submitted By : शांती स्वरूप मिश्र

Updated: January 10, 2017 — 10:37 am
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