DilSeDilTak.co.in

Shayari, SMS, Quotes, Jokes And More....




Category: Inspiring Stories – Hindi

Must Read : Radha Ne Krishna Se Puchha?

  1. Ek Bar Radha Ji Ne Krishna Se Puchha: Gussa Kya Hai..?

Bahut Khubsurat Jawab Mila: Kisi Ki Galti Ki Saza Khud Ko Dena..!

 

  1. Radha Ne Krishna Se Puchha: Dost Aur Pyar Me Kya Fark Hota Hai..?

Krishna Has Kar Bole: Pyar Sona Hai..Aur Dost Heera..Sona Tut Kar Dubara Ban Sakta Hai..Magar Heera Nahi..!

 

  1. Krishna Ji Ne radha se Puchha: Main Kaha Kaha Hu..?

Radha Ne Kaha: Tum Mere Dil Me..Sans Me..Jigar Me..Dhadkan Me..Tan Me..Man Me..Har Jagah Ho..!

 

Fir Radha Ji Ne Puchha: Main Kaha Nahi Hu..?

To Krishna Ne Kaha: Meri Kismat Me..!

 

  1. Radha Ne Shri Krishna Se Puchha: Pyar Ka Asli Matlab Kya Hota Hai..?

Shri Krishna Ne Has Kar Kaha: Jaha Matlab Hota Hai..Waha Pyar Hi Kaha Hota Hai..!

 

  1. Radha Ne Krishna Se Puchha: Apne Mujhse Prem Kiya..Lekin Shadi Rukmani Se Ki..Aisa Kyu..?

Krishna Ne Haste Hue Kaha: Radhe..Shadi Me Do Log Chahiye..Shadi Ke Liye Do Dil Aur Do Shareer Chahiye..Aur Hum To Ek Shreer Aur Ek Jan Hain..Tum Hi Batao Radha Aur Krishna Me Dusra Kaun Hai..Hum To Pahle Se Hi Ek Hain..Fir Hume Vivah Karne Ki Kya Aavashyakta..!

 

Niswarth Prem..Vivah Ke Bandhan Se Adhik Mahan..Aur Pavitra Hota Hai..

Isliye Radha Krishna Niswarth Prem Ki Pratimurti Hain..Aur Sadev Pujniya Hain..!

Updated: December 27, 2014 — 6:00 am

Prerak Hindi Story – Inspirational Kahani – धन की देवी और भूख की देवी

धन की देवी और भूख की देवी में
झगडा हो गया कारण…
दोनों में सुन्दर कौन .. न्याय कौन करे ?
इतने में उन्होंने देखा एक साधू महाराज को …..
दोनों महाराज के पास गयी, और पूछा हममे सुन्दर
कौन ?
महाराज ने दोनों का परिचय जाना और डर गये
किसको सुन्दर कहे..एक को सुन्दर कहते दूसरी नाराज
सोचने लगे ..सोचने के बाद उन्हें कहा..
दोनों सामने पेड़ तक जा के आओ फिर बताऊ
दोनों वापिस आई और पूछा ..अब बताओ
महाराज बोले :
जाते समय भूख ..सुन्दर लग रही थी
आते समय लक्ष्मी सुन्दर लग रही थी ….

Updated: October 2, 2018 — 1:48 pm

Motivational Short Story In Hindi – Practice Is The Greatest Teacher!!!

गुरु द्रोणाचार्य, पाण्डवोँ और कौरवोँ के गुरु थे, उन्हेँ धनुर्विद्या का ज्ञान देते थे।

एक दिन एकलव्य जो कि एक गरीब शुद्र परिवार से थे. द्रोणाचार्य के पास गये और बोले कि गुरुदेव मुझे भी धनुर्विद्या का ज्ञान प्राप्त करना है आपसे अनुरोध है कि मुझे भी आपका शिष्य बनाकर धनुर्विद्या का ज्ञान प्रदान करेँ।

किन्तु द्रोणाचार्य नेँ एकलव्य को अपनी विवशता बतायी और कहा कि वे किसी और गुरु से शिक्षा प्राप्त कर लें।

यह सुनकर एकलव्य वहाँ से चले गये।

इस घटना के बहुत दिनों बाद अर्जुन और द्रोणाचार्य शिकार के लिये जंगल की ओर गये। उनके साथ एक कुत्ता भी गया हुआ था। कुत्ता अचानक से दौड़ते हुय एक जगह पर जाकर भौँकनेँ लगा, वह काफी देर तक भोंकता रहा और फिर अचानक ही भौँकना बँद कर दिया। अर्जुन और गुरुदेव को यह कुछ अजीब लगा और वे उस स्थान की और बढ़ गए जहाँ से कुत्ते के भौंकने की आवाज़ आ रही थी।

उन्होनेँ वहाँ जाकर जो देखा वो एक अविश्वसनीय घटना थी। किसी ने कुत्ते को बिना चोट पहुंचाए उसका मुँह तीरोँ के माध्यम से बंद कर दिया था और वह चाह कर भी नहीं भौंक सकता था। ये देखकर द्रोणाचार्य चौँक गये और सोचनेँ लगे कि इतनी कुशलता से तीर चलाने का ज्ञान तो मैनेँ मेरे प्रिय शिष्य अर्जुन को भी नहीं दिया है और न ही ऐसे भेदनेँ वाला ज्ञान मेरे आलावा यहाँ कोई जानता है…. तो फिर ऐसी अविश्वसनीय घटना घटी कैसे?

तभी सामनेँ से एकलव्य अपनेँ हाथ मेँ तीर-कमान पकड़े आ रहा था।

ये देखकर तो गुरुदेव और भी चौँक गये।

द्रोणाचार्य नेँ एकलव्य से पुछा ,” बेटा तुमनेँ ये सब कैसे कर दिखाया।”

तब एकलव्य नेँ कहा , ” गुरूदेव मैनेँ यहाँ आपकी मूर्ती बनाई है और रोज इसकी वंदना करने के पश्चात मैं इसके समकक्ष कड़ा अभ्यास किया करता हूँ और इसी अभ्यास के चलते मैँ आज आपके सामनेँ धनुष पकड़नेँ के लायक बना हूँ।

गुरुदेव ने कहा , ” तुम धन्य हो ! तुम्हारे अभ्यास ने ही तुम्हेँ इतना श्रेष्ट धनुर्धर बनाया है और आज मैँ समझ गया कि अभ्यास ही सबसे बड़ा गुरू है।”

Updated: December 4, 2014 — 3:27 pm

Short Inspirational Story In Hindi – Ishwar Ki Marji

एक बच्चा अपनी माँ के साथ एक दुकान पर
शॉपिंग करने गया तो दुकानदार ने
उसकी मासूमियत देखकर
उसको सारी टॉफियों के डिब्बे खोलकर
कहा-: “लो बेटा टॉफियाँ ले लो…!!!”
पर उस बच्चे ने भी बड़े प्यार से उन्हें मना कर दिया. उसके बावजूद उस दुकानदार
ने और उसकी माँ ने भी उसे बहुत कहा पर
वो मना करता रहा. हारकर उस दुकानदार ने
खुद अपने हाथ से टॉफियाँ निकाल कर
उसको दीं तो उसने ले लीं और अपनी जेब में
डाल ली….!!!! वापस आते हुऐ उसकी माँ ने पूछा कि”जब
अंकल तुम्हारे सामने डिब्बा खोल कर
टाँफी दे रहे थे , तब तुमने नही ली और जब
उन्होंने अपने हाथों से दीं तो ले ली..!!
ऐसा क्यों..??”
तब उस बच्चे ने बहुत खूबसूरत प्यारा जवाब दिया -: “माँ मेरे हाथ छोटे-छोटे हैं… अगर मैं
टॉफियाँ लेता तो दो तीन
टाँफियाँ ही आती जबकि अंकल के हाथ बड़े
हैं इसलिये ज्यादा टॉफियाँ मिल गईं….!!!!!”
बिल्कुल इसी तरह जब भगवान हमें देता है
तो वो अपनी मर्जी से देता है और वो हमारी सोच से परे होता है,
हमें हमेशा उसकी मर्जी में खुश
रहना चाहिये….!!!
क्या पता..??
वो किसी दिन हमें पूरा समंदर
देना चाहता हो और हम हाथ में चम्मच लेकर खड़े हों…

Updated: December 3, 2014 — 11:21 am
Page 2 of 212
DilSeDilTak.co.in © 2015