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Category: Stories

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – मुल्ला झील में

एक दिन मुल्ला नसीरुद्दीन अपने दोस्त के साथ कंही जा रहा था तो जब वो एक झील के किनारे से गुजर रहे होते है मुल्ला का पैर फिसल जाता है और वो झील में गिरते गिरते बचा क्योंकि उसके आगे आगे चल रहे उसके दोस्त ने उसे गिरने से बचा लिया |

वो दिन तो ठीक लेकिन उसके बाद जब वो आपस में मिलते तो इस बात का जिक्र उसका दोस्त जरुर कर देता जिसकी वजह से मुल्ला नसीरुद्दीन परेशान हो गया और सोचने लगा इस अहसान से मुक्ति कैसे प्राप्त की जाये | इस पर मुल्ला को एक विचार आया |

मुल्ला एक दिन अपने दोस्त को उसी झील पर ले गया और वंहा ले जाकर खुद समेत कपड़ो और जूतों के उस झील में खुद गया और जब वह पूरी तरह भीग गया तो अपने दोस्त को चिल्लाकर कहने लगा देखो अगर तुमने उस दिन मुझे नहीं बचाया होता झील में गिरने से तो अधिक से अधिक मेरी ये हालत हो सकती थी | इसलिए भगवान के लिए अब उस बारे में बात करना बंद करो उस बारे में याद दिलाना बंद कर दो |

इस कहानी के द्वारा मुल्ला नसीरुद्दीन के हास्यास्पद कृत्य से हम ये समझ सकते है कि जिन्दगी में बहुत से ऐसे सौहार्द पूर्ण काम होते है जो हम किसी के लिए करते है या कोई हमारे लिए करता है तो इसका मतलब ये नहीं है हम उसके बारे में अहसान की तरह उसे जताए क्योंकि ऐसे में आप चाहे कितना भी कुछ अच्छा कर लें उसका महत्व खत्म हो जाती है |

ये कहानी आपको कैसी लगी इस बारे में नीचे कमेन्ट करे |

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – तीन बच्चे और मुल्ला नसीरुद्दीन

मुल्ला नसीरुद्दीन की पत्नी गर्भवती हुई और उसने मुल्ला नसीरुद्दीन से इस बारे में कहा कि अब हमे थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि कभी भी प्रसव हो सकता है ।

एक रात को दोनों सोये हुए थे और मुल्ला नसीरुद्दीन की पत्नी ने मुल्ला नसीरुद्दीन की और मुहं करके कहा कि मुझे प्रसव पीड़ा हो रहा है इस पर मुल्ला झट से उठा और जल्दी से जाकर मोमबत्ती जला ली । क्योंकि वह अपने नये जन्मे बच्चे को देखना चाहता था ।

थोड़ी देर में उसकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया तो मुल्ला क्या देखता है कुछ ही पलों के बाद उसे दूसरे बच्चे की किलकारी सुनाई दी और ऐसे ही थोड़े समय के अंतराल के बाद उसकी पत्नी ने तीसरे बच्चे को जन्म दिया ।

तीनो बच्चो को देखने के बाद मुल्ला नसीरुद्दीन ने मोमबती बुझा दी तो उसकी पत्नी ने उस से सवाल किया कि तुमने ऐसा क्यों किया ?

मुल्ला नसीरुद्दीन ने जवाब दिया तुमने देखा नहीं जब तक मोमबत्ती जल रही थी तुमने एक के बाद एक तीन बच्चो को जन्म दिया अगर मैं मोमबती न बुझाता तो न जाने कितने बच्चे और जन्म लेते ।

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – तलाक और मुल्ला नसरुद्दीन

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन गाँव के मुखिया के पास गया और बोला कि मैं अपनी पत्नी के रोज़ रोज़ के तानों से तंग आ गया और बोला कि मैं चाहता हूँ कि मैं अब उस से तलाक ले लूँ ।

मुखिया ने मुल्ला नसरुद्दीन से उसकी पत्नी का नाम पूछा तो मुल्ला नसरुद्दीन ने जवाब दिया “मैं नहीं जानता ।”

मुखिया हैरान रह गया और उसने मुल्ला नसरुद्दीन से पूछा कि तुम लोगो की शादी को कितना वक़्त हो गया है इस पर मुल्ला नसरुद्दीन ने जवाब दिया “ये कोई पांच साल से कुछ ऊपर हो गये है ।”

मुखिया ने फिर हैरान होकर पूछा इतनी लम्बी अवधि में तुम अपनी पत्नी का नाम तक नहीं जान पाए तो मुल्ला नसरुद्दीन ने सहज भाव से जवाब दिया “हाँ ये सही है मुझे नहीं पता ।”

मुखिया ने मुल्ला नसरुद्दीन से पूछा कि ऐसा क्यों है ? तो मुल्ला ने कहा वो इसलिए क्योंकि मेरा मेरी पत्नी के साथ कोई सामाजिक नाता नहीं रहा है कभी भी ।”

बेशक बहुत से लोग इस कहानी को एक मजाक ही समझने की भूल करेंगे लेकिन ऐसा नहीं है मुल्ला यंहा पर पागल नहीं हो गया है उसने बड़े ही विनोदपूर्ण ढंग से पति पत्नी के रिश्ते की गहराई को बयाँ किया है चूँकि पति पत्नी का नाता ऐसा नहीं है जिसे एक सामाजिक रिश्ते के तौर पर ही निभाया जाये जबकि यह एक एक मनुष्य की पूर्णता है जब वो एक स्त्री के साथ होता है । ये केवल एक कहानी नहीं है बल्कि जिन्दगी का एक बहुत महत्वपूर्ण सबक है बेहद संजीदगी के साथ ।

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – मुल्ला नसरुद्दीन की नई पत्नी और कोर्ट

मुल्ला नसरुद्दीन की पहली पत्नी के गुजर जाने के बाद उसने दूसरी शादी की । एक दिन वो दोनों पति पत्नी सो रहे थे कि उसकी नई पत्नी ने मुल्ला नसरुद्दीन से कहा कि “क्या तुम जानते हो मेरा पहले वाला पति बहुत आदर्श पति था ।”

मुल्ला नसरुद्दीन से ये सहा नहीं गया उसने जवाब दिया ” मेरी पहले वाली पत्नी तुमसे अधिक सुंदर और भली थी ।”

मुल्ला नसरुद्दीन की पत्नी ने जवाब दिया “मेरे पहले पति का कपडे पहनने का सलीका बहुत सही था ।”

मुल्ला बोला मेरी पहले वाली पत्नी भी बहुत कमाल का खाना बनाती थी ।

मुल्ला नसरुद्दीन की पत्नी बोली मेरे पहले वाला पति गणित में बहुत तेज था ।

मुल्ला बोला मेरी पत्नी भी गजब की प्रबंधक थी और घर के सारे काम काज बड़े अच्छे से सम्भाल लेती थी और उसके होते मुझे लेशमात्र भी किसी चीज़ के विषय में कभी सोचना नहीं पड़ा ।

इस प्रकार एक दूसरे के पिछले साथी के बारे में उनका विवाद काफी बढ़ गया तो मुल्ला ने अपनी पत्नी को धक्का देकर बेड से गिरा दिया और उसे बहुत चोटें आई ।

इस पर मुल्ला नसरुद्दीन की पत्नी उसे गाँव के पंचायत में ले गयी और जज से न्याय की गुहार की । तो जज ने दोनों को अपना अपना पक्ष रखने को कहा । मुल्ला की पत्नी ने उसे पूरी बात बताई तो जज अब मुल्ला नसरुद्दीन की और मुखातिब हुआ और बोला कि बताओ अब इस विषय में तुम्हे क्या कहना है ।

मुल्ला ने बड़े धीरज से जवाब दिया हम दोनों बड़े आराम से तब तक बेड पर सो रहे थे जब तक कि इसका पहले वाला पति और मेरी पहले वाली पत्नी बीच में नहीं आ गयी । फिर बेड हम दोनों के लिए छोटा पड़ गया और इसने नीचे गिर कर चोट खायी ।

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – ख़ुशी की तलाश और मुल्ला नसरुद्दीन

एक दिन मुल्ला नसरुद्दीन गाँव के बाहर बैठा हुआ था कि किसी दूसरे शहर से एक आदमी से उसकी भेंट हुई ।मुल्ला नसरुद्दीन ने उसके आने का प्रयोजन पूछा । कुछ देर वार्तालाप के बाद उस व्यक्ति ने मुल्ला नसरुद्दीन से कहा कि मेरे पास सब कुछ है “पैसा धन दौलत और खुशियों के सारे साधन भी” लेकिन फिर भी मैं खुश नहीं हूँ मैं अक्सर ख़ुशी की तलाश में निकल पड़ता हूँ ।

तो मुल्ला ने उस से सवाल किया तो क्या वो तुम्हे मिली । नहीं ! उस व्यक्ति ने मुल्ला को जवाब दिया ।

इस पर मुल्ला नसरुद्दीन ने बातों ही बातों में उसके हाथ से उसके बैग को छीना और वंहा से नो दो ग्यारह हो गया वो आदमी मुल्ला के पीछे जब तक दौड़ा जब तक कि मुल्ला नसरुद्दीन उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गया ।

मुल्ला नसरुद्दीन ने थोडा आगे जाकर बैग को सड़क पर रखा जन्हा से वो उस आदमी को दिखाई दे सके और खुद एक पेड़ के नीचे छुप कर बैठ गया । थोड़े देर बाद उस व्यक्ति ने उसे ढूंढ लिया और उसे पीटने ही वाला था कि मुल्ला नसरुद्दीन ने उस बैग की तरफ उसे इशारा किया तो उस आदमी के चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी । और बैग मिल जाने की ख़ुशी में वो खुशी से नाचने लगा ।

कुछ देर बाद उस व्यक्ति ने मुल्ला नसरुद्दीन से ऐसा करने की वजह पूछी तो मुल्ला नसरुद्दीन ने उसे जवाब दिया यह एक तरीका था तुम्हारी खुशियों से मुलाकात करवाने का जबकि तुम तो कह रहे थे तुम्हे आज तक वो आनंद नहीं मिला जो तुम चाहते थे जबकि अभी तो तुम ख़ुशी से नाच रहे थे ।

इस पर उस व्यक्ति को अहसास हुआ कि सच में खुशिया तो हमारे आस पास ही है हम केवल फालतू की भागदौड़ में जिन्दगी को खो देते है जबकि अगर हम अपने आस पास ही खुशियों की तलाश करे तो जान जायेंगे कि वो हमसे दूर कभी थी ही नहीं ।

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – आधा बच्चा मेरा आधा तुम्हारा

मुल्ला नसीरुद्दीन और उसकी पत्नी रात को सो रहे थे । देर रात को मुल्ला नसीरुद्दीन का एक बच्चा रोने लगा इस पर मुल्ला की पत्नी ने कहा “जाओ और बच्चे को संभालो वो रो रहा है तुम्हे दिखाई नहीं देता ।” वह अकेले मेरा नहीं है आधा तुम्हारा भी है ।

इस पर मुल्ला नसीरुद्दीन ने नींद में ही जवाब दिया “तुम चाहो तो जाकर अपने आधे बच्चे को चुप करवा सकती हो क्योंकि मैं तो अपने वाले आधे बच्चे को रोते हुए देखना पसंद करता हूँ ।”

मुल्ला नसीरुद्दीन की पत्नी ने अपना माथा पीट लिया ।

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Mulla Nasruddin Short Hindi Story – मुल्ला नसीरुद्दीन का गधा खो गया

एक बार मुल्ला नसीरुद्दीन का गधा खो गया | जो उसे बहुत ही प्रिय था । सब जगह दूंढा लेकिन फिर भी मुल्ला के हाथ निराशा ही लगी । गाँव के लोग भी मुल्ला नसीरुद्दीन की मदद के लिए आगे आये और पूरा गाँव खोज डाला गया लेकिन मुल्ला नसीरुद्दीन का गधा कंही नहीं मिला इस पर लोग भी हताश होकर कहने लगे गाँव में तो कंही नहीं है इसका मतलब तीर्थ यात्रा जाने वाले कारवें के साथ कंही निकल गया है सो उसे और खोजना भी व्यर्थ है कहकर वो अपने अपने घरों को चले गये ।

मुल्ला नसीरुद्दीन ने सोचा जब इतना खोज लिया है तो एक आखिरी उपाय और करलूं यह सोचकर वह अपने हाथों और पेरो के बल गधे के जैसे ही खड़ा हो गया और इधर उधर घूमने लगा और अपने घर मकान बगीचे का चक्कर लगा कर वह ठीक उसी गड्ढे के पास पहुँच गया जिसमे उसका प्रिय गधा गिरा हुआ उसे मिल गया ।

गाँव वाले सब हैरान हुए कहने लगे मुल्ला ये कौनसी तरकीब तुमने निकली हद ही हो गयी । तो मुल्ला कहने लगा जब आदमी बन गधे को खोजा तो कंही नही मिला तो सोचा कि गधे की कुंजी आदमी के पास तो है नहीं सोचकर मैं मन में भावना की मैं गधा हूँ और गधा होता तो कन्हा कन्हा जाता और कंहा दूसरे गधे को तलाश करता और मुझे मेरा गधा इस गड्ढे में पड़ा हुआ मिल गया । मुझे नहीं पता मैं कैसे इस गद्दे के पास आया लेकिन बस ये हो गया ।

Updated: July 23, 2015 — 10:27 am

Very Heart Touching Hindi Story On Father

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..

इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया
मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा …

जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है …..
आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था …. जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे …

मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ….
पता तो चले कितना माल छुपाया है …..
माँ से भी …

इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ….
मैंने जूता निकाल कर देखा …..
मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था …
जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..

और मुझे जाना ही था घर छोड़कर …

जैसे ही कुछ दूर चला ….
मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ….
पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था …..

जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी …..

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ….

मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..
लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए
पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था
उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ……
ओह….अच्छे जुते पहनना ???
पर उनके जुते तो ………..!!!!

माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो …
और वे हर बार कहते “अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे ..”
मैं अब समझा कितने चलेंगे

……तीसरी पर्ची ……….
पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये …
पढ़ते ही दिमाग घूम गया…..
पापा का स्कूटर ………….
ओह्ह्ह्ह

मैं घर की और भागा……..
अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ….

मैं घर पहुंचा …..
न पापा थे न स्कूटर …………..
ओह्ह्ह नही
मैं समझ गया कहाँ गए ….

मैं दौड़ा …..
और
एजेंसी पर पहुंचा……
पापा वहीँ थे ……………

मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया ..

…..नहीं…पापा नहीं…….. मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल…

बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..

वो भी आपके तरीके से …।।

“माँ” एक ऐसी बैंक है जहाँ आप हर भावना और दुख जमा कर सकते है…

और

“पापा” एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिनके पास बैलेंस न होते हुए भी हमारे सपने पूरे करने की कोशिश करते है……..

 

मैं अपने पेरेंट्स से प्यार करता हुँ…….♥ ♥ ♥…

अगर दिल के किसी कोने को छू जाये तो शेयर कर देना…..

Updated: June 13, 2015 — 7:23 am

मुलाकात अकबर-बीरबल की – अकबर बीरबल के किस्से

अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वे किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला और केवल कुछ सिपाहियों को छोड़ कर बाकी सेना पीछे रह गई. शाम घिर आई थी, सभी भूखे और प्यासे थे, और समझ गए थे की वो रास्ता भटक गए हैं. राजा को समझ नहीं आ रहा था की वह किस तरफ़ जाएं.
कुछ दूर जाने पर उन्हें एक तिराहा नज़र आया. राजा बहुत खुश हुए चलो अब तो किसी तरह वे अपनी राजधानी पहुँच ही जायेंगे. लेकिन जाएं तो जायें किस तरफ़. राजा उलझन में थे. वे सभी सोच में थे किंतु कोई युक्ति नहीं सूझ रही थी. तभी उन्होंने देखा कि एक लड़का उन्हें सड़क के किनारे खड़ा-खडा घूर रहा है. सैनिकों ने यह देखा तो उसे पकड़ कर राजा के सामने पेश किया. राजा ने कड़कती आवाज़ में पूछा, “ऐ लड़के, आगरा के लिए कौन सी सड़क जाती है”? लड़का मुस्कुराया और कहा, “जनाब, ये सड़क चल नहीं सकती तो ये आगरा कैसे जायेगी”. महाराज जाना तो आपको ही पड़ेगा और यह कहकर वह खिलखिलाकर हंस पड़ा.

सभी सैनिक मौन खड़े थे, वे राजा के गुस्से से वाकिफ थे. लड़का फ़िर बोला,” जनाब, लोग चलते हैं, रास्ते नहीं”. यह सुनकर इस बार राजा मुस्कुराया और कहा,” नहीं, तुम ठीक कह रहे हो. तुम्हारा नाम क्या है, अकबर ने पूछा. मेरा नाम महेश दास है महाराज, लड़के ने उत्तर दिया, और आप कौन हैं? अकबर ने अपनी अंगूठी निकाल कर महेश दास को देते हुए कहा, “तुम महाराजा अकबर – हिंदुस्तान के सम्राट से बात कर रहे हो”. मुझे निडर लोग पसंद हैं. तुम मेरे दरबार में आना और मुझे ये अंगूठी दिखाना. ये अंगूठी देख कर मैं तुम्हें पहचान लूंगा. अब तुम मुझे बताओ कि मैं किस रास्ते पर चलूँ ताकि मैं आगरा पहुँच जाऊं.

महेश दास ने सिर झुका कर आगरा का रास्ता बताया और जाते हुए हिंदुस्तान के सम्राट को देखता रहा|

और इस तरह अकबर भविष्य के बीरबल से मिले ।

Updated: May 16, 2015 — 11:45 am

फेहरिस्त मूर्खों की – अकबर बीरबल के किस्से

बादशाह अकबर घुड़सवारी के इतने शौकीन थे कि पसंद आने पर घोड़े का मुंहमांगा दाम देने को तैयार रहते थे। दूर-दराज के मुल्कों, जैसे अरब, पर्शिया आदि से घोड़ों के विक्रेता मजबूत व आकर्षक घोड़े लेकर दरबार में आया करते थे। बादशाह अपने व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए चुने गए घोड़े की अच्छी कीमत दिया करते थे। जो घोड़े बादशाह की रुचि के नहीं होते थे उन्हें सेना के लिए खरीद लिया जाता था।

अकबर के दरबार में घोड़े के विक्रेताओं का अच्छा व्यापार होता था।

एक दिन घोड़ों का एक नया विक्रेता दरबार में आया। अन्य व्यापारी भी उसे नहीं जानते थे। उसने दो बेहद आकर्षक घोड़े बादशाह को बेचे और कहा कि वह ठीक ऐसे ही सौ घोड़े और लाकर दे सकता है, बशर्ते उसे आधी कीमत पेशगी दे दी जाए।

बादशाह को चूंकि घोड़े बहुत पसंद आए थे, सो वैसे ही सौ और घोड़े लेने का तुरंत मन बना लिया।

बादशाह ने अपने खजांची को बुलाकर व्यापारी को आधी रकम अदा करने को कहा। खजांची उस व्यापारी को लेकर खजाने की ओर चल दिया। लेकिन किसी को भी यह उचित नहीं लगा कि बादशाह ने एक अनजान व्यापारी को इतनी बड़ी रकम बतौर पेशगी दे दी। लेकिन विरोध जताने की हिम्मत किसी के पास न थी।

सभी चाहते थे कि बीरबल यह मामला उठाए।

बीरबल भी इस सौदे से खुश न था। वह बोला, ‘‘हुजूर ! कल मुझे आपने शहर भर के मूर्खों की सूची बनाने को कहा था। मुझे खेद है कि उस सूची में आपका नाम सबसे ऊपर है।’’

बादशाह अकबर का चेहरा मारे गुस्से के सुर्ख हो गया। उन्हें लगा कि बीरबल ने भरे दरबार में विदेशी मेहमानों के सामने उनका अपमान किया है।

गुस्से से भरे बादशाह चिल्लाए, ‘‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमें मूर्ख बताने की ?’’

‘‘क्षमा करें बादशाह सलामत।’’ बीरबल अपना सिर झुकाते हुए सम्मानित लहजे में बोला आप चाहें तो मेरा सर कलम करवा दें, यदि आप के कहने पर तैयार की गई मूर्खों की फेहरिस्त में आपका नाम सबसे ऊपर रखना आपको गलत लगे।’’

दरबार में ऐसा सन्नाटा छा गया कि सुई गिरे तो आवाज सुनाई दे जाए।

अब बादशाह अकबर अपना सीधा हाथ उठाए, तर्जनी को बीरबल की ओर ताने आगे बढ़े। दरबार में मौजूद सभी लोगों की सांस जैसे थम सी गई थी। उत्सुक्ता व उत्तेजना सभी के चेहरों पर नृत्य कर रही थी। उन्हें लगा कि बादशाह सलामत बीरबल का सिर धड़ से अलग कर देंगे। इससे पहले किसी की इतनी हिम्मत न हुई थी कि बादशाह को मूर्ख कहे।

लेकिन बादशाह ने अपना हाथ बीरबल के कंधे पर रख दिया। वह कारण जानना चाहते थे। बीरबल समझ गया कि बादशाह क्या चाहते हैं। वह बोला, ‘‘आपने घोड़ों के ऐसे व्यापारी को बिना सोचे-समझे एक मोटी रकम पेशगी दे दी, जिसका अता-पता भी कोई नहीं जानता। वह आपको धोखा भी दे सकता है। इसलिए मूर्खों की सूची में आपका नाम सबसे ऊपर है। हो सकता है कि अब वह व्यापारी वापस ही न लौटे। वह किसी अन्य देश में जाकर बस जाएगा और आपको ढूढ़े नहीं मिलेगा। किसी से कोई भी सौदा करने के पूर्व उसके बारे में जानकारी तो होनी ही चाहिए। उस व्यापारी ने आपको मात्र दो घोड़े बेचे और आप इतने मोहित हो गए कि मोटी रकम बिना उसको जाने-पहचाने ही दे दी। यही कारण है बस।’’

‘‘तुरंत खजाने में जाओ और रकम की अदायगी रुकवा दो।’’ अकबर ने तुरंत अपने एक सेवक को दौड़ाया।

बीरबल बोला, ‘‘अब आपका नाम उस सूची में नहीं रहेगा।’’

बादशाह अकबर कुछ क्षण तो बीरबल को घूरते रहे, फिर अपनी दृष्टि दरबारियों पर केन्द्रित कर ठहाका लगाकर हंस पड़े। सभी लोगों ने राहत की सांस ली कि बादशाह को अपनी गलती का अहसास हो गया था। हंसी में दरबारियों ने भी साथ दिया और बीरबल की चतुराई की एक स्वर से प्रशंसा की।

Updated: May 16, 2015 — 11:45 am
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