DilSeDilTak.co.in

Shayari, SMS, Quotes, Jokes And More....




Category: Stories

बात सबके मन की – अकबर बीरबल के किस्से

एक बार दरबार में एक सभासद ने बादशाह अकबर से कहा – जहाँपनाह ! ऐसा कौन सा प्रश्न है ,जो हम नहीं बता सकते और बीरबल बता सकता है ?
बादशाह ने मन में सोचा कि इसको बीरबल से नीचा दिखाऊंगा . यह सोचकर उन्होंने कहा – अच्छा बताओ इस समय लोगों के मन में क्या है ?
वह सभासद बोला – हुजूर ! यह बात तो सिवाय खुदा के और कोई नहीं बता सकता ,बीरबल बता दें तो हम जाने .
उसी समय बीरबल बुलाये गए . उनके सामने भी यही प्रश्न रखा गया . उन्होंने तुरंत ही कहा इस समय सबके मन में यही बात है कि यह दरबार सदा इसी तरह भरा रहे और बादशाह सलामत सदा जिंदा रहें .
सभी ने उनकी बात को मान लिया , क्योंकि अस्वीकार करने पर मौत किसे बुलानी थी . बेचारा सभासद अपना सा मुँह लेकर रह गया . बादशाह अकबर जबाब को सुनकर बड़े प्रसन्न हुए और बीरबल को पुरस्कार भी दिया .

Updated: May 16, 2015 — 11:45 am

मुलाकात अकबर-बीरबल की – अकबर बीरबल के किस्से

अकबर को शिकार का बहुत शौक था. वे किसी भी तरह शिकार के लिए समय निकल ही लेते थे. बाद में वे अपने समय के बहुत ही अच्छे घुड़सवार और शिकरी भी कहलाये. एक बार राजा अकबर शिकार के लिए निकले, घोडे पर सरपट दौड़ते हुए उन्हें पता ही नहीं चला और केवल कुछ सिपाहियों को छोड़ कर बाकी सेना पीछे रह गई. शाम घिर आई थी, सभी भूखे और प्यासे थे, और समझ गए थे की वो रास्ता भटक गए हैं. राजा को समझ नहीं आ रहा था की वह किस तरफ़ जाएं.
कुछ दूर जाने पर उन्हें एक तिराहा नज़र आया. राजा बहुत खुश हुए चलो अब तो किसी तरह वे अपनी राजधानी पहुँच ही जायेंगे. लेकिन जाएं तो जायें किस तरफ़. राजा उलझन में थे. वे सभी सोच में थे किंतु कोई युक्ति नहीं सूझ रही थी. तभी उन्होंने देखा कि एक लड़का उन्हें सड़क के किनारे खड़ा-खडा घूर रहा है. सैनिकों ने यह देखा तो उसे पकड़ कर राजा के सामने पेश किया. राजा ने कड़कती आवाज़ में पूछा, “ऐ लड़के, आगरा के लिए कौन सी सड़क जाती है”? लड़का मुस्कुराया और कहा, “जनाब, ये सड़क चल नहीं सकती तो ये आगरा कैसे जायेगी”. महाराज जाना तो आपको ही पड़ेगा और यह कहकर वह खिलखिलाकर हंस पड़ा.

सभी सैनिक मौन खड़े थे, वे राजा के गुस्से से वाकिफ थे. लड़का फ़िर बोला,” जनाब, लोग चलते हैं, रास्ते नहीं”. यह सुनकर इस बार राजा मुस्कुराया और कहा,” नहीं, तुम ठीक कह रहे हो. तुम्हारा नाम क्या है, अकबर ने पूछा. मेरा नाम महेश दास है महाराज, लड़के ने उत्तर दिया, और आप कौन हैं? अकबर ने अपनी अंगूठी निकाल कर महेश दास को देते हुए कहा, “तुम महाराजा अकबर – हिंदुस्तान के सम्राट से बात कर रहे हो”. मुझे निडर लोग पसंद हैं. तुम मेरे दरबार में आना और मुझे ये अंगूठी दिखाना. ये अंगूठी देख कर मैं तुम्हें पहचान लूंगा. अब तुम मुझे बताओ कि मैं किस रास्ते पर चलूँ ताकि मैं आगरा पहुँच जाऊं.

महेश दास ने सिर झुका कर आगरा का रास्ता बताया और जाते हुए हिंदुस्तान के सम्राट को देखता रहा|

और इस तरह अकबर भविष्य के बीरबल से मिले ।

Updated: May 16, 2015 — 11:45 am

तीन सवाल – अकबर बीरबल के किस्से

महाराजा अकबर, बीरबल की हाज़िरजवाबी के बडे कायल थे. उनकी इस बात से दरबार के अन्य मंत्री मन ही मन बहुत जलते थे. उनमें से एक मंत्री, जो महामंत्री का पद पाने का लोभी था, ने मन ही मन एक योजना बनायी. उसे मालूम था कि जब तक बीरबल दरबार में मुख्य सलाहकार के रूप में है उसकी यह इच्छा कभी पूरी नहीं हो सकती.
एक दिन दरबार में अकबर ने बीरबल की हाज़िरजवाबी की बहुत प्रशंसा की. यह सब सुनकर उस मंत्री को बहुत गुस्सा आया. उसने महाराज से कहा कि यदि बीरबल मेरे तीन सवालों का उत्तर सही-सही दे देता है तो मैं उसकी बुद्धिमता को स्वीकार कर लुंगा और यदि नहीं तो इससे यह सिद्ध होता है की वह महाराज का चापलूस है. अकबर को मालूम था कि बीरबल उसके सवालों का जवाब जरूर दे देगा इसलिये उन्होंने उस मंत्री की बात स्वीकार कर ली.
उस मंत्री के तीन सवाल थे –
१. आकाश में कितने तारे हैं?
२. धरती का केन्द्र कहाँ है?
३. सारे संसार में कितने स्त्री और कितने पुरूष हैं?
अकबर ने फौरन बीरबल से इन सवालों के जवाब देने के लिये कहा. और शर्त रखी कि यदि वह इनका उत्तर नहीं जानता है तो मुख्य सलाहकार का पद छोडने के लिये तैयार रहे.
बीरबल ने कहा, “तो सुनिये महाराज”.
पहला सवाल – बीरबल ने एक भेड मँगवायी. और कहा जितने बाल इस भेड के शरीर पर हैं आकाश में उतने ही तारे हैं. मेरे दोस्त, गिनकर तस्सली कर लो, बीरबल ने मंत्री की तरफ मुस्कुराते हुए कहा.
दूसरा सवाल – बीरबल ने ज़मीन पर कुछ लकीरें खिंची और कुछ हिसाब लगाया. फिर एक लोहे की छड मँगवायी गयी और उसे एक जगह गाड दिया और बीरबल ने महाराज से कहा, “महाराज बिल्कुल इसी जगह धरती का केन्द्र है, चाहे तो आप स्व्यं जाँच लें”. महाराज बोले ठीक है अब तीसरे सवाल के बारे में कहो.
अब महाराज तीसरे सवाल का जवाब बडा मुश्किल है. क्योंकि इस दुनीया में कुछ लोग ऐसे हैं जो ना तो स्त्री की श्रेणी में आते हैं और ना ही पुरूषों की श्रेणी. उनमें से कुछ लोग तो हमारे दरबार में भी उपस्थित हैं जैसे कि ये मंत्री जी. महाराज यदि आप इनको मौत के घाट उतरवा दें तो मैं स्त्री-पुरूष की सही सही संख्या बता सकता हूँ. अब मंत्री जी सवालों का जवाब छोडकर थर-थर काँपने लगे और महाराज से बोले,”महाराज बस-बस मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल गया. मैं बीरबल की बुद्धिमानी को मान गया हूँ”.
महाराज हमेशा की तरह बीरबल की तरफ पीठ करके हँसने लगे और इसी बीच वह मंत्री दरबार से खिसक लिया.

Updated: May 16, 2015 — 11:45 am

राज्य में कितने कौए हैं? – अकबर बीरबल के किस्से

एक दिन अकबर अपने मत्रीं बीरबल के साथ अपने महल के बाग में घूम रहे थे. बीरबल बागों में उडते कौओं को देखकर कुछ सोचने लगे और बीरबल से पूछा, “क्यों बीरबल, हमारे राज्य में कितने कौए होंगे?”

बीरबल ने कुछ देर अंगुलियों पर कुछ हिसाब लगाया और बोले, “हुज़ूर, हमारे राज्य में कुल मिलाकर १,११, ९८७ कौए हैं”.

“तुम इतना विश्वास से कैसे कह सकते हो?”, अकबर बोले.

“हुज़ूर, आप खुद गिन लिजीये”, बीरबल बोले.

अकबर को कुछ इसी प्रकार के जवाब का अंदेशा था. उन्होंने ने पूछा, “बीरबल, यदि इससे कम हुए तो?”

“तो इसका मतलब है कि कुछ कौए अपने रिश्तेदारों से मिलने दूसरे राज्यों में गये हैं. और यदि ज्यादा हुए तो? तो इसका मतलब यह हैं हु़जूर कि कुछ कौए अपने रिश्तेदारों से मिलने हमारे राज्य में आये हैं”, बीरबल ने मुस्कुरा कर जवाब दिया.

अकबर एक बार फिर मुस्कुरा कर रह गये.

Updated: May 16, 2015 — 11:45 am

Heart Touching Stroy In Hindi Font On Gau Hatya

एक बार एक कसाई गाय को काट रहा था और गाय हँस रही थी…. . . . ये सब देख के कसाई बोला.. “मै तुम्हे मार रहा हू और तुम मुझपर हँस क्यो रही हो…?” . . . . . गाय बोलीः जिन्दगी भर मैने घास के सिवा कुछ नही खाया… फिर भी मेरी मौत इतनी दर्दनाक है. तो हे इंसान जरा सोच तु मुझे मार के खायेगा तो तेरा अंत कैसा होगा…?. दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया… अपने बच्चे से भी छीना पर मैंने तुमको दूध दिया रूखी सूखी खाती थी मैं, कभी न किसी को सताती थी मैं… कोने में पड़ जाती थी मैं, दूध नहीं दे सकती मैं, अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों कीआग से तूने, भोजन अपना पकाया था… गोबर गैस से रोशन कर के, तेरा घर उजलाया था… क्यों मुझको बेच रहा रे, उस कसाई के हाथों में…?? पड़ी रहूंगी इक कोने में, मत कर लालच माँ हूँ मैं… मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी, वह कहता था जग से न्यारी… उसकी बंसी की धुन पर मैं, भूली थी यह दुनिया सारी.. मत कर बेटा तू यह पाप, अपनी माँ को न बेच आप… रूखी सूखी खा लूँगी मैं किसी को नहीं सताऊँगी मैं तेरे काम ही आई थी मैं तेरे काम ही आउंगी मैं… अगर आप गौमाता से प्यार करते हैं और आपने गौमाता का दूध पिया है1 तो इस मेसेज को शेयर करके थोडा बहुत दूध का कर्ज चुकता करे…. सर्व कि एक पुकार… गौ हत्या अब नहीं स्वीकार….!! गौमाता की यह पीड़ा जन जन तक पहुँचाने के लिये केवल 2 मिनट का समय निकाल कर दोस्तों को शेयर जरुर करें……..!!

Updated: May 16, 2015 — 11:35 am

Inspirational Story In Hindi Font – चोरी का माल मोरी में

हमारे घर के पास एक डेरी वाला है. वह डेरी वाला एसा है कि आधा किलो घी में अगर घी 50२ ग्राम तुल गया तो 2 ग्राम घी निकाल लेता था.

एक बार मैं आधा किलो घी लेने गया. उसने मुझे 90 रूपय ज्यादा दे दिये. मैंने कुछ देर सोचा और पैसे लेकर निकल लिया. मैंने मन में सोचा कि 2-2 ग्राम से तूने जितना बचाया था बच्चू अब एक ही दिन में निकल गया. मैंने घर आकर अपनी गृहल्क्षमी को कुछ नहीं बताया और घी दे दिया. उसने जैसे ही घी डब्बे में पलटा आधा घी बिखर गया. मुझे झट से “बेटा चोरी का माल मोरी में” वाली कहावत याद आ गयी. और साहब यकीन मानीये वो घी किचन की सिंक में ही गिरा था.

इस वाकये को कई महीने बीत गये थे. परसों शाम को मैं एग रोल लेने गया. उसने भी मुझे सत्तर रूपय ज्याद दे दिये. मैंने मन ही मन सोचा चलो बेटा आज फिर चैक करते हैं की क्या वाकई भगवान हमें देखता है. मैंने रोल पैक कराये और पैसे लेकर निकल लिया. आश्चर्य तब हुआ जब एक रोल अचानक रास्ते में ही गिर गया. घर पहुँचा, बचा हुआ रोल टेबल पर रखा, जूस निकालने के लिये अपना मनपसंद काँच का गिलास उठाया… अरे यह क्या गिलास हाथ से फिसल कर टूट गया. मैंने हिसाब लगाय करीब-करीब सत्तर में से साठ रूपय का नुकसान हो चुका था. मैं बडा आश्चर्यचकित था.

और अब सुनिये ये भगवान तो मेरे पीछे ही पड गया जब कल शाम को सुभिक्षा वाले ने मुझे तीस रूपय ज्याद दे दिये. मैंने अपनी धर्म-पत्नी से पूछा क्या कहती हो एक ट्राई और मारें. उन्होने मुस्कुराते हुये कहा – जी नहीं. और हमने पैसे वापस कर दिये. बाहर आकर हमारी धर्म-पत्नी जी ने कहा – वैसे एक ट्राई और मारनी चाहिये थी. बस इतना कहना था कि उन्हें एक ठोकर लगी और वह गिरते-गिरते बचीं.

मैं सोच में पड गया कि क्या वाकई भगवान हमें देख रहा है.

Updated: May 16, 2015 — 11:35 am

Funny Story In Hindi – Ek buddha aadmi bus me kahi jaa rahaa tha

Ek buddha aadmi bus me kahi jaa rahaa tha ki tabhi kisi jebkatre ne uska batua saaf kar diya. Jab buddhe ko iska ahsaas hua to wah robdaar aawaaz mein dahaadte huye bola – “Jis kisi ne bhi mera batua churaya hai chupchaap waapas kar de warna … aaj fir se wahi hoga jo san 80 me hua thaa !” Koi bhi sawaari kuchh bhi nahi boli magar buddhe ne haar nahi maani. Woh bus mein ghoom-ghoom kar baar-baar yahi kahta raha – “chupchap mera batua waapas kar do warna … aaj fir wahi hokar rahega jo san 80 me hua tha !” Akhirkar bus jaise hi ek jagah ruki toh ek ladka uska batua fenk kar bus se utar kar bhaag gaya. Buddhe ne chupchap apna batua uthaya aur apni seat par baith gaya. Ek bachche se nahi raha gaya. usne poochha – “aakhir san 80 me kya hua tha ?” Buddha bola – “san 80 me isi tarah kisi ne bus mein mera batua chura liya tha…. aur fir mujhe paidal hi ghar waapas jaana pada tha ….”

Updated: May 16, 2015 — 11:35 am

Short Inspiring Hindi Story – एक दिन ‘दर्द’ ने ‘दौलत’ से कहा

एक दिन ‘दर्द’ ने ‘दौलत’ से
कहा -:

“तुम कितनी खुशनसीब हो
कि हर कोई तुम्हें पाने की
कोशिश करता है और मैं
इतना बदनसीब हूँ कि हर
कोई मुझसे दूर जाने की
कोशिश करता है।”

‘दौलत’ ने बहुत प्यारा
जवाब दिया -:

“खुशनसीब तो तुम हो ,
जिसको पाकर लोग अपनो
को याद करते हैं…

बदनसीब तो मैं हूँ जिसको
पा कर लोग अक्सर अपनों
को भूल जाते हैँ”

Updated: February 13, 2015 — 2:55 pm

Very Funny Story In Hindi Font – एक खुबसूरत हसीना रास्ते मे आपको लिफ्ट मांगती है

एक खुबसूरत हसीना रास्ते मे आपको लिफ्ट मांगती है . और आगे कुच्छ दूर जाने के बाद उसे चक्कर आने लगते है तो आप उसे हॉस्पिटल ले जाते है
डॉक्टर खुशीसे आपको कहता है ” बधाई हो आप बाप बनने वाले है ”
बस आपको टेंशन आता है
फिर आप बोलते हो ” लेकिन वो बच्चा तो मेरा नहीं है ”
लड़की बोलती है ” नहीं यही मेरे होनेवाले बच्चे का बाप है ”
आपको और टेंशन आता है
पुलिस आती है और आपका डी एन ऐ टेस्ट होता है. रिपोर्ट आता है. रिपोर्ट के मुताबिक ”आप कभीभी बाप बन नहीं सकते है ”
आपको और ज्यादा टेंशन आता है
किसी तरह भगवान का शुक्रिया अदा कर आप घर वापस लौटते है .
फिर आप सोचते है ” घर मे मुझे दो बच्चे है … अगर मै बाप नहीं बन सकता तो वे फिर किसके है? ”
अब ये है असली टेंशन वाली बात …

Updated: February 13, 2015 — 2:55 pm

A Motivational Short Story In Hindi – Prerak Bodh Katha

एक राजा था। वह एक दिन अपने वज़ीर से नाराज हो गया और उसे एक बहुत बड़ी मीनार के ऊपर कैद कर दिया। एक प्रकार से यह अत्यन्त कष्टप्रद मृत्युदण्ड ही था। न तो उसे कोई भोजन पहुंचा सकता था और न उस गगनचुम्बी मीनार से कूदकर उसके भागने की कोई संभावना थी।

जिस समय उसे पकड़कर मीनार पर ले जाया रहा था, लोगों ने देखा कि वह जरा भी चिंतित और दुखी नहीं है, उल्टे सदा की भांति आनंदित और प्रसन्न है। उसकी पत्नी ने रोते हुए उसे विदा दी और पूछा, “तुम इतने प्रसन्न क्यों हो?”

उसने कहा, “यदि रेशम का एक बहुत पतला सूत भी मेरे पास पहुंचाया जा सकता तो मैं स्वतंत्र हो जाऊंगा। क्या इतना-सा काम भी तुम नहीं कर सकोगी?”

उसकी पत्नी ने बहुत सोचा, लेकिन इतनी ऊंची मीनार पर रेशम कापतला धागा पहुंचाने का कोई उपाय उसकी समझ में न आया। तब उसने एक फकीर से पूछा। फकीर ने कहा, “भृंग नाम के कीड़े को पकड़ो। उसके पैर में रेशम के धागे को बांध दो और उसकी मूंछों के बालों पर शहद की एक बूंद रखकर उसका मुंह चोटी की ओर करके मीनार पर छोड़ दो।”

उसी रात को ऐसा किया गया। वह कीड़ा सामने मधु की गंध पाकर, उसे पाने के लोभ में, धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा और आखिर उसने अपनी यात्रा पूरी कर ली। रेशम के धागे का एक छोर कैदी के हाथ में पहुंच गया।

रेशम का यह पतला धागा उसकी मुक्ति और जीवन बन गया। उससे फिर सूत का धागा बांधकर ऊपर पहुंचाया गया, फिर सूत के धागे से डोरी और डोरी से मोटा रस्सा। उस रस्से के सहारे वह कैद से बाहर हो गया।

सूर्य तक पहुंचने के लिए प्रकाश की एक किरण बहुत है। वह किरण किसी को पहुंचानी भी नहीं है। वह तो हर एक के पास मौजूद है।

Updated: January 8, 2015 — 7:55 pm
Page 3 of 512345







DilSeDilTak.co.in © 2015