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Hindi Inspiring Story

Heart Touching Hindi Short Story On Girl’s Ways Of Dressing

Heart Touching Hindi Short Story On Girl’s Ways Of Dressing…

कृप्या सभी लडकीयां इसे ध्यान से पढें
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एक लड़की से मैने पुछा:- बहन तुमने यह Artificial Ear Rings, Locket और Ring क्यों पहनी है? तुम्हारे Branded कपड़ो से तो तुम गरीब नहीं लग रही !
लड़की बोली:- भाई आज कल असली गहने पहनने का जमाना नहीं, गली गली चोर घुम रहे है। घरवाले पुलिस वाले हर कोई मना करता है असली पहनने को।
मैने पूछा बहन पर कोई तुम्हें ऐसा करने से कैसे रोक सकता है, जबकी यह तुम्हारा अधिकार (Rights) है। कानून भी तुम्हे ऐसा करने से नहीं रोक सकता। फिर तुम पर एैसी पाबंदी क्यों?
लड़की बोली:- तुम पागल तो नही हो गए। आज कल गली-गली चोर बदमाश घूम रहे है, क्या मै इतने कीमती गहना ऐसे ही लुटवाती रहुँ।
अधिकार (Rights) तो तुम्हे याद है पर कर्तव्य (Duty) भूल गए।
मैने बोला:- बहन मै तुम्हे यही बताना चाहता था। तुम्हारे शरीर/तुम्हारी इज्जत से कीमती गहना कोई नहीं। सोने चांदी हीरे के गहने तो तुम छुपा कर रखती हो पर अनमोल गहने की तुम नुमाइश कर रही हो, जबकी तुम्हे भी पता है गली
गली दरिंदे हैवान घूम रहे है। छोटे कपड़े पहनना तुम्हारा अधिकार (Rights) है, पर जैसे तुम सोना चांदी के गहनों को संभालना अपना कर्तव्य (Duty) समझती हो वैसे ही इज्जत को पर्दे में रखना भी तुम्हारा कर्तव्य (Duty) है। चोर हो या
बलात्कारी उन्हें शिक्षा/संस्कार/इज्जत से कुछ लेना देना नहीं। हमें खुद ही संभाल कर चलना पड़ेगा।
अपनी आँखों पर से पश्चमी सभ्यता (Western Culture) का चश्मा उतारना होगा। नारी के जरा से वस्त्र खींच लेने मात्र पर ” महाभारत ” लड़ने वाले आज देश की दुर्दशा देखिये…..!
” आज उसी नारी को दुपट्टा लेने को बोल दो तो ” महाभारत” हो जाती है ।।

Updated: November 25, 2015 — 5:20 pm

Short Inspirational Story In Hindi – Ishwar Ki Marji

एक बच्चा अपनी माँ के साथ एक दुकान पर
शॉपिंग करने गया तो दुकानदार ने
उसकी मासूमियत देखकर
उसको सारी टॉफियों के डिब्बे खोलकर
कहा-: “लो बेटा टॉफियाँ ले लो…!!!”
पर उस बच्चे ने भी बड़े प्यार से उन्हें मना कर दिया. उसके बावजूद उस दुकानदार
ने और उसकी माँ ने भी उसे बहुत कहा पर
वो मना करता रहा. हारकर उस दुकानदार ने
खुद अपने हाथ से टॉफियाँ निकाल कर
उसको दीं तो उसने ले लीं और अपनी जेब में
डाल ली….!!!! वापस आते हुऐ उसकी माँ ने पूछा कि”जब
अंकल तुम्हारे सामने डिब्बा खोल कर
टाँफी दे रहे थे , तब तुमने नही ली और जब
उन्होंने अपने हाथों से दीं तो ले ली..!!
ऐसा क्यों..??”
तब उस बच्चे ने बहुत खूबसूरत प्यारा जवाब दिया -: “माँ मेरे हाथ छोटे-छोटे हैं… अगर मैं
टॉफियाँ लेता तो दो तीन
टाँफियाँ ही आती जबकि अंकल के हाथ बड़े
हैं इसलिये ज्यादा टॉफियाँ मिल गईं….!!!!!”
बिल्कुल इसी तरह जब भगवान हमें देता है
तो वो अपनी मर्जी से देता है और वो हमारी सोच से परे होता है,
हमें हमेशा उसकी मर्जी में खुश
रहना चाहिये….!!!
क्या पता..??
वो किसी दिन हमें पूरा समंदर
देना चाहता हो और हम हाथ में चम्मच लेकर खड़े हों…


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Updated: December 3, 2014 — 11:21 am
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