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Heart Touching Stroy In Hindi Font On Gau Hatya

एक बार एक कसाई गाय को काट रहा था और गाय हँस रही थी…. . . . ये सब देख के कसाई बोला.. “मै तुम्हे मार रहा हू और तुम मुझपर हँस क्यो रही हो…?” . . . . . गाय बोलीः जिन्दगी भर मैने घास के सिवा कुछ नही खाया… फिर भी मेरी मौत इतनी दर्दनाक है. तो हे इंसान जरा सोच तु मुझे मार के खायेगा तो तेरा अंत कैसा होगा…?. दूध पिला कर मैंने तुमको बड़ा किया… अपने बच्चे से भी छीना पर मैंने तुमको दूध दिया रूखी सूखी खाती थी मैं, कभी न किसी को सताती थी मैं… कोने में पड़ जाती थी मैं, दूध नहीं दे सकती मैं, अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों कीआग से तूने, भोजन अपना पकाया था… गोबर गैस से रोशन कर के, तेरा घर उजलाया था… क्यों मुझको बेच रहा रे, उस कसाई के हाथों में…?? पड़ी रहूंगी इक कोने में, मत कर लालच माँ हूँ मैं… मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी, वह कहता था जग से न्यारी… उसकी बंसी की धुन पर मैं, भूली थी यह दुनिया सारी.. मत कर बेटा तू यह पाप, अपनी माँ को न बेच आप… रूखी सूखी खा लूँगी मैं किसी को नहीं सताऊँगी मैं तेरे काम ही आई थी मैं तेरे काम ही आउंगी मैं… अगर आप गौमाता से प्यार करते हैं और आपने गौमाता का दूध पिया है1 तो इस मेसेज को शेयर करके थोडा बहुत दूध का कर्ज चुकता करे…. सर्व कि एक पुकार… गौ हत्या अब नहीं स्वीकार….!! गौमाता की यह पीड़ा जन जन तक पहुँचाने के लिये केवल 2 मिनट का समय निकाल कर दोस्तों को शेयर जरुर करें……..!!


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Updated: May 16, 2015 — 11:35 am

Inspirational Story In Hindi Font – चोरी का माल मोरी में

हमारे घर के पास एक डेरी वाला है. वह डेरी वाला एसा है कि आधा किलो घी में अगर घी 50२ ग्राम तुल गया तो 2 ग्राम घी निकाल लेता था.

एक बार मैं आधा किलो घी लेने गया. उसने मुझे 90 रूपय ज्यादा दे दिये. मैंने कुछ देर सोचा और पैसे लेकर निकल लिया. मैंने मन में सोचा कि 2-2 ग्राम से तूने जितना बचाया था बच्चू अब एक ही दिन में निकल गया. मैंने घर आकर अपनी गृहल्क्षमी को कुछ नहीं बताया और घी दे दिया. उसने जैसे ही घी डब्बे में पलटा आधा घी बिखर गया. मुझे झट से “बेटा चोरी का माल मोरी में” वाली कहावत याद आ गयी. और साहब यकीन मानीये वो घी किचन की सिंक में ही गिरा था.

इस वाकये को कई महीने बीत गये थे. परसों शाम को मैं एग रोल लेने गया. उसने भी मुझे सत्तर रूपय ज्याद दे दिये. मैंने मन ही मन सोचा चलो बेटा आज फिर चैक करते हैं की क्या वाकई भगवान हमें देखता है. मैंने रोल पैक कराये और पैसे लेकर निकल लिया. आश्चर्य तब हुआ जब एक रोल अचानक रास्ते में ही गिर गया. घर पहुँचा, बचा हुआ रोल टेबल पर रखा, जूस निकालने के लिये अपना मनपसंद काँच का गिलास उठाया… अरे यह क्या गिलास हाथ से फिसल कर टूट गया. मैंने हिसाब लगाय करीब-करीब सत्तर में से साठ रूपय का नुकसान हो चुका था. मैं बडा आश्चर्यचकित था.

और अब सुनिये ये भगवान तो मेरे पीछे ही पड गया जब कल शाम को सुभिक्षा वाले ने मुझे तीस रूपय ज्याद दे दिये. मैंने अपनी धर्म-पत्नी से पूछा क्या कहती हो एक ट्राई और मारें. उन्होने मुस्कुराते हुये कहा – जी नहीं. और हमने पैसे वापस कर दिये. बाहर आकर हमारी धर्म-पत्नी जी ने कहा – वैसे एक ट्राई और मारनी चाहिये थी. बस इतना कहना था कि उन्हें एक ठोकर लगी और वह गिरते-गिरते बचीं.

मैं सोच में पड गया कि क्या वाकई भगवान हमें देख रहा है.

Updated: May 16, 2015 — 11:35 am
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