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Tag: Mother Poetry In Hindi

Mother Hindi Shayari – ठंडे पानी में गरीब माँ

ठंडे पानी में गरीब माँ 🏻के हाथ बर्तन मांजते रहे
अपने बच्चों के हाथो 🏻की लकीरे बदलने के लिये


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Updated: May 4, 2017 — 11:02 am

Mother Hindi Shayari – रुके तो चाँद जैसी हैं

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रुके तो चाँद जैसी हैं चले तो हवाओं जैसी हैं…
वो माँ ही हैं जो धूप में भी छाँव जैसी हैं…

Updated: April 26, 2017 — 2:11 pm

Mother Hindi Shayari – मेरी खताओ को भी वो

मेरी खताओ को भी वो माफ़ कर देती है।
एक माँ है जो दर्द में भी इंसाफ कर देती है।
मै रूठ जाऊ तो माँ खाना नहीं खाती है।
बस यही बात मुझे मेरे खिलाफ कर देती है।।

Updated: April 18, 2017 — 10:33 am

Mother Hindi Shayari – नींदों मे यूँ सांसे सहम

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नींदों मे यूँ सांसे सहम जाती है,
माँ ख्वाबों मे आकर जब रो देती है.

Updated: April 10, 2017 — 10:54 am

Mother Hindi Shayari – सब लोग घर पर ही

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सब लोग घर पर ही होते हैं मग़र…
जब माँ घर पर नहीं होती तो घर सूना सूना क़्यो लगता हैं ?..

Updated: February 17, 2017 — 11:04 am

Mother Hindi Shayari – तेरे दामन में सितारे होंगे

तेरे दामन में सितारे होंगे ऐ फलक
मुझको मेरी माँ की मैली ओढ़नी अच्छी लगी

Updated: January 27, 2017 — 4:21 pm

Hindi Poetry On Mother By Munawwar Rana – सिरफिरे लोग हमें दुश्मने जाँ कहते हैं

सिरफिरे लोग हमें दुश्मने जाँ कहते हैं
हम जो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं

मुझे बस इसलिए अच्छी बहार लगती है
कि ये भी माँ की तरह खुशग्वार लगती है

मैंने रोते हुए पोंछे थे किसी दिन आँसू
मुद्दतों माँ ने नहीं धोया दुपट्टा अपना

लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती

किसी को घर मिला हिस्से में या दुकाँ आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
माँ बहुत गुस्से में होती है तो रो देती

ये ऐसा कर्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटू मेरी माँ सजदे में रहती है

खाने की चीज़ें माँ ने जो भेजी थीं गाँव से
बासी भी हो गई हैं तो लज्जत वही रही

बरबाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सबसे कह रही है बेटा मज़े में है

लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है,
मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है।

मंज़िल न दे चराग न दे हौसला तो दे
तिनके का ही सही तू मगर आसरा तो दे
मैंने ये कब कहा के मेरे हक में हो जवाब
लेकिन खामोश क्यूँ है तू कोई फैसला तो दे
बरसों मैं तेरे नाम पे खाता रहा फरेब
मेरे खुदा कहाँ है तू अपना पता तो दे
बेशक मेरे नसीब पे रख अपना इख्तियार
लेकिन मेरे नसीब में क्या है बता तो दे

Updated: February 13, 2015 — 2:55 pm
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