DilSeDilTak.co.in

Shayari, SMS, Quotes, Jokes And More....

rahat indori shayari in hindi font

Rahat Indori Ghazal Shayari – Log Har Mod Pe Ruk Ruk Ke Sambhalte Kyon Hain

लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यों हैं

नींद से मेरा त’अल्लुक़ ही नहीं बरसों से
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं

मोड़ होता है जवानी का संभलने के लिए
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यों हैं.,.,!!!

Updated: January 22, 2015 — 5:10 pm

Famous Ghazal By Rahat Indori – Har Ek Chehre Ko Zakhmo Ka Aina Na Kaho

हर एक चेहरे को ज़ख़्मों का आईना न कहो|
ये ज़िन्दगी तो है रहमत इसे सज़ा न कहो|

न जाने कौन सी मज़बूरीओं का क़ैदी हो,
वो साथ छोड़ गया है तो बेवफ़ा न कहो|

तमाम शहर ने नेज़ों पे क्यूँ उछाला मुझे,
ये इत्तेफ़ाक़ था तुम इस को हादसा न कहो|

ये और बात कि दुश्मन हुआ है आज मगर,
वो मेरा दोस्त था कल तक उसे बुरा न कहो|

हमारे ऐब हमें उँगलियों पे गिनवाओ,
हमारी पीठ के पीछे हमें बुरा न कहो|

मैं वक़ियात की ज़न्जीर का नहीं क़ायल,
मुझे भी अपने गुनाहों का सिलसिला न कहो|

ये शहर वो है जहाँ राक्षस भी है “राहत”,
हर एक तराशे हुये बुत को देवता न कहो|


Advertisements
loading...
Updated: January 22, 2015 — 5:10 pm
loading...
Loading...
Loading...
DilSeDilTak.co.in © 2015