2 Line Shayari – मंजिलें सब का मुकद्दर हों, यह ज़रूरी

मंजिलें सब का मुकद्दर हों, यह ज़रूरी तो नहीं 
खो भी जाते हैं, नयी राहों पर चलने वाले


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