Furqat Hindi Shayari – सितारों से उलझता जा रहा


सितारों से उलझता जा रहा हूँ
शबे-फ़ुर्कत बहुत घबरा रहा हूँ

यकीं ये है हक़ीकत खुल रही है
गुमां ये है कि धोखे खा रहा हूँ

Furqat Hindi Shayari – ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो

ज़ुबाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे
ख़ुद को देख सकूँ आइने में फिर वो रुआब तो दे
बहुत जिए फ़ुर्कत के आलम में
अब शब-ए-वस्ल का मेहताब तो दे

Furqat Hindi Shayari – शब-ए-फ़ुर्कत का जागा हूँ फ़रिश्तों

शब-ए-फ़ुर्कत का जागा हूँ फ़रिश्तों अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता-आहिस्ता

Furqat Hindi Shayari – और कुछ देर न गुज़रे

और कुछ देर न गुज़रे शब्-ए-फ़ुर्कत से कहो
दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते हैं

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