मोहब्बत में कोई फरमाइश न करना

मोहब्बत में कोई फरमाइश न करना
मेरी ग़ुरबत की फिर नुमाइश न करना

जान तो मुस्कुरा कर दूंगा अगर चाहो
वफ़ा के नाम पर हज़ार आज़माइश न करना

ख्वाबों की ताबीर भी बदल जाती है
कभी ख्वाबों की ख्वाइश न करना

आँखों में पानी देख कर जल न जाये
देखना समुन्दर के करीब रिहायश न करना

तू नहीं पास मगर दिल में मेरे शाकिर
इन फ़ासलों की कभी पैमाइश मत करना

अपना ग़म भूल गये तेरी जफ़ा भूल गये

अपना ग़म भूल गये तेरी जफ़ा भूल गये,
हम तो हर बात मोहब्बत के सिवा भूल गये,
हम अकेले ही नहीं प्यार के दीवाने सनम,
आप भी नज़रें झुकाने की अदा भूल गये,
अब तो सोचा है के दामन ही तेरा थामेंगे,
हाथ जब हमने उठाये हैं दुआ भूल गये,
शुक्र समझो या इसे अपनी शिकायत समझो,
तुम ने वो दर्द दिया है के दवा भूल गये,

A Nice Ghazal – दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा

दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा,
याद-ए-ख़ुदा किये जा तुझ को ख़ुदा मिलेगा,
दौलत हो या हुकूमत ताक़त हो या जवानी,
हर चीज़ मिटनेवाली हर चीज़ आनी-जानी,
ये सब ग़ुरूर इक दिन मिट्टी में जा मिलेगा,
आता नहीं पलटकर गुज़रा हुआ ज़माना,
क्या ख़्वाब का भरोसा क्या मौत का ठिकाना,
ये ज़िंदगी गंवाकर क्या फ़ायदा मिलेगा,