Hindi Ghazal Shaayari – मेरी आँखों में हैं जो ख़्वाब नए-पुराने तुम्हारे हैं

मेरे गीत, मेरी गजलें, मेरे सब अफ़साने तुम्हारे हैं
मेरी आँखों में हैं जो ख़्वाब नए-पुराने तुम्हारे हैं

तुम बिछुड़ कर भी कहीं मुझ ही में रह गए
जिनमें मैं उलझा हूँ सब ताने-बाने तुम्हारे हैं

जो भी डूबता है फिर कब निकलता है
इतने गहरे आँखों के मयखाने तुम्हारे हैं

मैं तो फ़कीर हूँ भला चुकाऊँ भी तो कैसे
मोहब्बत में करोड़ों के ज़ुरमाने तुम्हारे हैं

अभी कुछ देर और ये सिर झुका रहने दो
अभी बाकी कुछ अहसान चुकाने तुम्हारे हैं

Submitted By : धर्मवीर